तहसीलदार ने एसडीएम बन दलित की भूमि हड़पने का रचा षड़यंत्र
तहसीलदार ने एसडीएम बन दलित की भूमि हड़पने का रचा षड़यंत्र
बसपा नेत्री व हिस्ट्रीशीटर पति के इशारो पर चल रही साहब की कलम
उन्नाव। ‘पैसा बोलता है.....’ ये शब्द वर्तमान परिवेश में तहसील प्रशासन द्वारा की जा रही अनियमित तथा अवैधानिक कार्यवाही को पूर्णतया चरितार्थ कर रहे हैं। यह हम नहीं कह रहे बल्कि तहसीलदार सदर की कारगुजारियां बयां कर रही है जो बसपा नेत्री प्रियंका दुबे और उनके अपराधिक प्रवृत्ति वाले पति शेखर दुबे के इशारो पर कानून को धता बताकर स्वयं ही उपजिलाधिकारी बन गये और उपजिलाधिकारी के कार्यो को अपने आदेश में कानूनी धाराओ को गत लिखकर स्वयं निर्णय करने लगे हैं।
विदित हो कि अनुसूचित जाति के शुक्लागंज निवासी सुरेश चन्द्र ने सदर तहसील की ग्रामसभा ख्वाजगीपुर में अपनी स्वयं की क्रय की हुई भूमिधरी जमीन को बाद प्राप्त करने अनुमति विक्रय किया था और एक वर्ष पूर्व ही क्रेता का नाम राजस्व अभिलेखो में दर्ज हो चुका था। ऐसी स्थिति में राजस्व अभिलेखो मंे यदि क्रेता के नाम में सुधार करना था तो धारा-30 सपठित नियम-36 उप्र राजस्व संहिता 2006 में यह क्षेत्राधिकार उपजिलाधिकारी को निहित है और तहसीलदार केवल इस सम्बन्ध में अपनी आख्या भेज सकता है वह भी तब जब प्रभावित पक्षकार को सुनवाई का सम्पूर्ण अवसर दिया जा चुका हो किन्तु तहसीलदार सदर को बसपा नेता के इशारे पर अनुसूचित जाति के लोगों को षड़यंत्र के तहत भारतीय जनता पार्टी और योगी सरकार के विरूद्ध भड़काना है अतः तहसीलदार ने एक ही दिन में बिना सम्बन्धित पक्षकारो को सुनवाई का अवसर दिये स्वयं उपजिलाधिकारी के क्षेत्राधिकार का प्रयोग कर डाला और अनुसूचित जाति की भूमिधरी जमीन हड़प कर डाली। ‘उसी दिन दायरा, उसी दिन सुनवाई और उसी दिन निर्णय’ तहसीलदार के इस ऐतिहासिक फैसले से आम जनमानस तो दूर स्वयं अधिकारी भी दांतो तले अंगुलियां दबा रहे हैं।
इन्सेट
दिन-रात सिर्फ काम....सिर्फ काम.....?
उन्नाव। सूत्रो की माने तो तहसीलदार सदर ओमप्रकाश शुक्ला वर्तमान में इतने क्रियाशील हैं कि उन्हें न तो अपने घर की याद रहती है न परिवार की, दिन-रात सिर्फ काम में तल्लीन रहते हैं और इतना काम करते हैं कि कभी-कभी बेहोश होकर टेबल पर ही गिर जाते हैं लेकिन यह काम कौन से हैं, स्वयं जिला प्रशासन भी इसकी खोजबीन करने में जुटा है लेकिन दलित सुरेश चन्द्र के प्रकरण से यह तो तय हो गया है कि तहसील में हो रहे इस ओवरटाइम में कुछ बहुत बड़ा गड़बड़झाला हो रहा है।
प्रधान सम्पादक
हिमांशु श्रीवास्तव
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