उन्नाव। वर्तमान में प्रदेश की तानाशाह अफसरशाही अवैध धन के लालच में लोगों के जीवन से भी खिलवाड़ करने से नही चूक रही है।
उन्नाव। वर्तमान में प्रदेश की तानाशाह अफसरशाही अवैध धन के लालच में लोगों के जीवन से भी खिलवाड़ करने से नहीं चूक रही है। भारतीय संविधान एवं राजस्व नियमों-कानूनो को बलाए ताक कर पद का दुरूपयोग करने वाले अफसर अवैध धन के लालच में किसी भी हद तक जा सकते हैं। ऐसा ही मामला तहसील सदर की ग्रामसभा ख्वाजगीपुर का प्रकाश में आया है जहां दलित द्वारा बाकायदा प्रशासन से परमीशन लेकर बेची गयी भूमि को प्रशासन ने अवैध करार देते हुए ग्रामसभा में निहित करने का फरमान जारी कर दिया है। जबकि बिक्री की गयी भूमि पर प्लाटिंग का मूल्यांकन कर स्टाम्प दिया गया है और राजस्व नियमो के तहत यदि किसी दलित की भूमि पर प्लाटिंग का स्टाम्प देकर बैनामा कराया गया है तो उसमें प्रशासन की अनुमति की आवश्यकता ही नहीं है लेकिन तहसीलदार ने इन सारे नियम-कानूनो को तिलांजलि देकर स्वयं को सर्वोपरि कर दलित को दर-दर भटकने के लिए मजबूर कर दिया है।
सदर तहसील की ग्रामसभा ख्वाजगीपुर की भूमि संख्या-3066 का सुरेश चन्द्र जो कि दलित है, संक्रमणीय भूमिधर था। जिसने अर्सा डेढ़ वर्ष पूर्व अपनी बीमारी के चलते जब कोई रास्ता नहीं बचा तो भूमि बिक्री का विचार किया लेकिन दलित होने के नाते प्रशासन की अनुमति आड़े आयी तो उसने प्रशासन से विधिक प्रक्रिया अपनाकर अनुमति भी प्राप्त की लेकिन उसके बाद भी रजिस्टार ने भूमि बिक्री के लिए प्लाटिंग के मूल्यांकन के हिसाब से स्टाम्प अदा करने का निर्देश दिया। जिसपर प्लाटिंग के हिसाब से स्टाम्प भी अदा किया गया और भूमि विक्रय हो गया। तत्पश्चात क्रेतागणो ने भूमि पर अपने भवन निर्मित करा लिये लेकिन एक वर्ष बाद अचानक मामला तब उजागर हुआ जब तहसीलदार ने विक्रेता के खिलाफ एक चार सौ बीसी की एफआईआर यह कहते हुए दर्ज करा दी कि उसने भूमि बिक्री की परमीशन ही नहीं ली। जिससे विक्रेता समेत क्रेताओ में भी हड़कम्प मच गया। हालांकि भूमि पर प्लाटिंग के मूल्यांकन के अनुसार स्टाम्प अदा किया गया था लिहाजा परमीशन की आवश्यकता ही नहीं थी लेकिन तहसीलदार शायद स्वयं को संविधान तथा राजस्व कानून से भी ऊपर समझते हैं लिहाजा सारे नियम-कानूनो को दर-किनार करते हुए परमीशन निरस्त कर भूमि ग्रामसभा में निहित करने की कार्यवाही शुरू कर दी। जबकि राजस्व परिषद ने 13 फरवरी 2004 को निर्देश संख्या-13 वर्ष 1995-96 श्रीमती तमसीरन-बनाम-स्टेट उ0प्र0 में आदेश पारित किया है कि यदि भूमि आबादी की है और अधिनियम की धारा-166 व 167 लागू नहीं होते हैं, प्लाटिंग का स्टाम्प अदा किया गया है तो अनुसूचित जाति के व्यक्ति द्वारा कलेक्टर की अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं
है और ना ही भूमि गांवसभा में निहित होगी।
प्रधान सम्पादक
हिमांशु श्रीवास्तव
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